जब सुपरमार्केट में किसी ने लाइन तोड़ी: एक छोटी सी बदला कहानी
समझिए, आप लंबी खरीदारी के बाद थके-हारे सुपरमार्केट की लाइन में खड़े हैं। हाथ में टोकरी, दिमाग में अगले पकवान की रेसिपी, और बस उम्मीद है कि जल्दी से घर पहुंचें। तभी आपके पीछे खड़ी कोई "आंटी" या "अंकल" बिना कुछ कहे अपने सामान बेल्ट पर रखने लगते हैं – जब आप अभी आधा सामान भी नहीं निकाल पाए! ऐसे में गुस्सा आए तो गलत नहीं है, लेकिन कभी-कभी बदला भी बड़ा मजेदार हो सकता है।