ऑफिस की राजनीति और छोटी बदला: फ्लेक्सी-टाइम का खेल और करारा जवाब
ऑफिस की दुनिया भी किसी पारिवारिक ड्रामे से कम नहीं होती! कभी बॉस के ताने, कभी सहकर्मियों की जलन, तो कभी चाय के ब्रेक पर होने वाली गॉसिप—सबकुछ मसालेदार। लेकिन जब बात आती है अपने हक के लिए खड़े होने की, तो कई बार सबसे अच्छा बदला वही होता है, जो सामने वाले को खुद उसकी गलती का अहसास करा दे। आज की कहानी एक ऐसे ही कर्मचारी की है, जिसने अपने ऑफिस की "फ्लेक्सी-टाइम" ड्यूटी का पूरा फायदा उठाया—और जब जलनखोर टीम ने उसकी आज़ादी छीननी चाही, तो उसने ऐसा दांव चला कि सबकी बोलती बंद हो गई!