जब 'मदद नहीं करूँगा' ने ऑफिस को सिखाया असली सबक
हमारे देश के दफ्तरों में एक कहावत है – "जहाँ काम होता है, वहाँ जुगाड़ चलता है।" लेकिन जब ऑफिस की नीतियाँ ही जुगाड़ के खिलाफ हो जाएँ, तो क्या हो? आज की कहानी बिलकुल इसी पर है – और यकीन मानिए, ये कहानी हर IT या ऑफिस कर्मचारी के दिल के बहुत करीब है।
कभी-कभी ऑफिस में ऐसे फरमान आते हैं कि सुनकर लगता है, "भई, ये तो चूहे को दूध का पहरेदार बनाने जैसा है!" एक रिटायर्ड सॉफ्टवेयर डेवेलपर की कहानी वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटी-सी "मालिशियस कम्प्लायंस" (यानी आदेश मानना, लेकिन अंदाज ऐसा कि सामने वाले को खुद ही पछताना पड़े) ने पूरे ऑफिस की आँखें खोल दीं।