रात दो बजे होटल में पहुँचे 'पेंटागन वाले' साहब – असली या नकली जासूस?
रात के दो बज रहे थे। होटल की रिसेप्शन पर सन्नाटा पसरा था। कर्मचारी की ड्यूटी थी कि आखिरी मेहमान के आने तक जागकर इंतज़ार किया जाए। तभी अचानक दरवाज़ा खुलता है और एक साहब सीना ताने रिसेप्शन की ओर बढ़ते हैं। आते ही बोले – "मैं पेंटागन से हूँ, मुझे तुरंत आपके कंप्यूटर की ज़रूरत है।"
अब सोचिए, हमारे देश में कोई अचानक बोले – "मैं रक्षा मंत्रालय से हूँ!" – तो क्या आप तुरंत कंप्यूटर थमा देंगे या पहले दो बार सोचेंगे? कहानी यहीं से मज़ेदार मोड़ लेती है।