“भैया, मुझे एक उबर बुला दो!” – होटल रिसेप्शन की वो सच्ची कहानी, जो हर भारतीय को हँसा भी देगी, सोचने पर भी मजबूर कर देगी
अगर आप कभी किसी होटल के रिसेप्शन पर गए हैं, तो आपने जरूर ऐसे किसी मेहमान को देखा होगा – जो कन्फ्यूज़ होकर पूछता है, “भैया, मेरे लिए एक उबर बुला दो।” सुनने में भले ही ये आम बात लगे, लेकिन इसके पीछे छुपी है एक मज़ेदार, गूढ़ और कभी-कभी झल्ला देने वाली हकीकत!
आज की कहानी है एक ऐसे नाइट ऑडिटर की, जिसने बीस साल की हॉस्पिटैलिटी सर्विस में न जाने कितनी बार ये सवाल सुना – और हर बार मन ही मन सोचा, “भैया, ये उबर-टैक्सी वाला चक्कर है ही बड़ा गड़बड़झाला!” इस कहानी में टेक्नोलॉजी, भारतीय जुगाड़ और इंसानियत – तीनों का अनोखा संगम है।