होटल में आए 'कब तक रुकेंगे?' मेहमान – रिसेप्शनिस्ट की सबसे बड़ी सिरदर्दी!
होटल व्यवसाय में काम करना अपने आप में किसी रोलर कोस्टर राइड से कम नहीं। सोचिए, जब दिवाली या दशहरे के वक्त किसी धार्मिक स्थल या टूरिस्ट स्पॉट के पास होटल पूरी तरह भरे हों, और उसी समय कोई परिवार अपनी मर्जी चलाने लगे – तो स्टाफ की क्या हालत होती होगी? आज हम आपको ऐसी ही एक घटना सुनाने जा रहे हैं, जिसने होटल के रिसेप्शनिस्ट का दिन तो खराब किया ही, साथ ही पाठकों को एक सीख भी दे गई कि 'अतिथि देवो भव' का मतलब हर बार सिर झुकाकर सहना नहीं होता।