होटल के फ्रंट डेस्क की नौकरी: इज्जत चाहिए तो झेलना पड़ेगा!
हमारे देश में अक्सर सुनने को मिलता है – “अतिथि देवो भवः।” पर जब होटल में मेहमान बनकर आते हैं, तो कुछ लोग ‘देव’ कम और ‘राजा’ ज्यादा बन जाते हैं। होटल के फ्रंट डेस्क पर काम करने वाले कर्मचारी इस बात को दिल से समझ सकते हैं!
आज हम बात करेंगे उस शख्स की, जिसने पहली बार होटल के फ्रंट डेस्क पर काम करने की हिम्मत की, और तब उसे समझ आया कि ‘इज्जत’ कमाने के लिए कितनी मेहनत और धैर्य चाहिए। पहले ये साहब बैकस्टेज – हाउसकीपिंग, लॉन्ड्री, सफाई वगैरह में थे, पर जब सीधे मेहमानों से दो-चार हुए, तो जैसे “जीना इधर का, मरना उधर का” वाली हालत हो गई!