होटल की रिसेप्शन पर इच्छाओं के राजा: जब मेहमान की पसंद टकराई हकीकत से
होटल की रिसेप्शन डेस्क पर काम करना, मानो हर दिन नयी फिल्म का पहला शो देखने जैसा है। कभी-कभी तो लगता है जैसे मेहमानों से बात निकलवाने के लिए उनकी ज़बान खींचनी पड़े, और कभी ऐसे लोग आ जाते हैं जो बिना ब्रेक के अपनी फरमाइशों की गंगा बहा देते हैं। आज की कहानी है ऐसे ही एक 'खास' मेहमान की, जिनका नाम हम रखेंगे—मिस्टर विश। क्यों? क्योंकि साहब की तो हर बात में 'मुझे ये चाहिए', 'वो चाहिए', 'ऐसे चाहिए' चलता ही रहा।